अगर आप संस्कृतिक
अभिलेखों को जानने की इच्छा रखते है तो जाईयें तैयार।
मध्यप्रदेश के
विदिशा जिले में स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर भ्रमण के लिए।
मध्यप्रदेश पुरातत्व विभाग के अधीन नीलकंठेश्वर मंदिर विदिशा जिले से महज 60 कि.मी. की दूरी पर आज एक
छोटे से गाँव के रूप में विकसित है
जहाँ पर रेल मार्ग द्वारा नजदीकी रेल्वे स्टेशन
बरेठ से पहुँचा जा सकता है निजी वाहन या टेक्सी से भी आसानी से पहुँच सकते है।
तो आईये जानते है
मंदिर के कुछ तथ्यों को
नीलकंठेश्वर मंदिर
का निर्माण परमार वंश के राजा उदयादित्य ने कराया था शिलालेखों के उल्लेख से पता
चलता है इस मंदिर का निर्माण 11ई.पू. में कराया गया होगा। संपूर्ण मंदिर का
निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है वर्तमान मंदिर प्रागण में एक प्रवेश द्वार
दिया गया है जिसमें मंदिर मध्य में स्थित है जिसमें तीन द्वार व गर्भगृह में एक विशाल शिवलिंग स्थापित
किया गया है स्वत: इस मंदिर का निर्माण खजुराहों के मंदिर की तर्ज
पर किया गया है जिसमें पत्थरो पर देवी- देवताओं की प्रतिमा, सूर्य, चंद्रमा की
कलाकृतियों को सौंदर्य पूर्ण अंकित किया गया है मंदिर के शिखर पर एक मानवाकृति की
स्वर्गारोहन करते हुए दिखाया गया है। यह राजा अथवा वास्तुकार हो सकता है साथ ही मंदिर के चारों तरफ छोटे मंदिरो का भी
निर्माण कराया गया था जिसके कुछ अवशेष आज भी मौजूद है मंदिर को कुछ मुस्लिम आक्रमण
कारियों द्वारा कई बार क्षति पहुँचाई गयी जिसमें सबसे पहले अलाउद्दीन खिलजी का
सिपहसालार मलिक काफूर ने सन् 1336- 1338 ई. इसे ज्वलनशील पदार्थों से उड़ाने की
कोशिश की। इससे मंदिर के भीतर में काला धब्बा पड़ गया। इसके बाद दिल्ली के सुल्तान
मोहम्मद तुगलक ने भी इसे क्षतिग्रस्त किया। मुस्लिम शासन के दौरान मंदिर के ही
पीछे की तरफ उसी दौर में मस्जिद का निर्माण करवाया।
नीलकंठेश्वर
मंदिर के आसपास के प्रमुख स्मारक
1. बीजामंडल या घड़ियालन
का मकान
2. बारा- खम्भी
3. पिसनारी का मंदिर
4. शाही मस्जिद और महल
5. घोड़दौड़ की बाओली
6. रावण टोर






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